पहला अनुभव...
- Nov 26, 2017
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आरोहण की प्रथम कक्षा में आज कुछ पल के लिए मुझे शिक्षिका बनने का अवसर प्राप्त हुआ ।मैंने कई बच्चों को पढ़ाया पर उसमे से एक बच्ची ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया ।उसका नाम ख़ुशी है ,उसकी उम्र अंदाजन 12 साल के आस-पास रही होगी पर उसको अभी तक कुछ भी नहीं आता था न ही वो पढ़ने के लिए उत्सुक थी ।जब मैंने उससे पूछा की तुम क्या बनना चाहती हो तो उसने बेमन से जवाब दिया अभी कुछ सोचा नहीं ।मैंने पूछा स्कूल जाती हो तो अन्य बच्चों ने हँसते हुए कहा माँगने(भीख माँगने)जाती है ये ,,मैंने उससे पूछा अब पढ़ोगी तो सर हिला दिया की हाँ।मैंने उससे अंगरेजी का 1 लिखाया तो झट से उसने सीधी रेखा खींच दी लेकिन जब बोला 2 लिखो तो उसकी लेखनी रुक गयी ।मैंने उसे अपने पास बुलाया और जो तरीके मैंने बचपन में सीखे थे की बिंदी बना के 2 लिखो और उल्टा "c"फिर उसके पेट से एक क्षैतिज रेखा मिलाना ,,आदि आदि सिखाने का प्रयास किया और उसने 2 लिख के दिखा दिया फिर 3 को सिखाया ।इन सब चीजों में मैंने ये ध्यान दिया की उसकी सीखने की उत्सुकता बढ़ रही थी और वो पूरी कोशिश कर रही थी सीखने की ।जैसे ही वो सही लिख लेती वो खुश हो जाती।आज मुझे अनुभव हुआ की अगर आप अपनी इच्छा से एक पहल करिये तो शायद खुशी जैसे कई बच्चे जो भीड़ में भीख मांगने को मजबूर हैं वो भी पढ़ने के लिए संघर्ष करेंगे और निः संदेह जिस दिन ऐसे बच्चे कुछ कर के दिखा देंगें उस दिन आपका भी सर गर्व से ऊँचा हो जायेगा।अपना एक घण्टा भी ऐसे गरीब बच्चों को देने की कोशिश कीजिये और देखिये जो आत्मसंतुष्टि प्राप्त होगी वो अकल्पनीय होगी।सोचिये मत कर के दिखाइये शायद एक दिन अशिक्षारूपी दानव पराजित होगा ।शायद एक सुकून भरा एहसास होगा जो और कहीं नहीं ,शायद!सोच के देखिये,,आपका एक प्रयास कई लोगों की ज़िन्दगी बदल सकता है। Thank you very much AROHAN team



















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